राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¯à¤‚सेवक संघ (RSS) आरà¤à¤¸à¤à¤¸ का मानना है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ को à¤à¤• हिंदू राषà¥à¤Ÿà¥à¤° होना चाहिà¤, जहां हिंदू संसà¥à¤•ृति और मूलà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को पà¥à¤°à¤®à¥à¤–ता दी जाà¤. आरà¤à¤¸à¤à¤¸ का यह à¤à¥€ मानना है कि à¤à¤¾à¤°à¤¤ में हिंदू बहà¥à¤®à¤¤ में हैं, और यह धरà¥à¤®à¤¨à¤¿à¤°à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤· देश होने के लिठà¤à¥€ à¤à¤• कारण है. à¤à¤¸à¥‡ में आज हम इस लेख के जरिठजानेंगे कि आरà¤à¤¸à¤à¤¸ को सांसà¥à¤•ृतिक नजरिठसे कैसे समà¤à¤¾ जा सकता है।
बता दें, साल 1913 में फà¥à¤°à¥‡à¤‚च मैथमेटिशियन à¤à¤®à¤¿à¤² बोरेल (Émile Borel) ने अनंत बंदर पà¥à¤°à¤®à¥‡à¤¯ ( Infinite Monkey theorem) का पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ रखा, जिसमें सà¥à¤à¤¾à¤µ दिया गया कि अनंत काल के लिठयादृचà¥à¤›à¤¿à¤• रूप से टाइप करने वाला à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥‡à¤¯ कोई à¤à¥€ कलà¥à¤ªà¤¨à¥€à¤¯ पाठ, यहां तक ​​कि शेकà¥à¤¸à¤ªà¤¿à¤¯à¤° की रचनाà¤à¤‚ बना सकता है। बता दें, आज डिजिटल à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤œà¥à¤® के जमाने में हो रही है सà¤à¥€ गतिविधियां को अनंत à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ पà¥à¤°à¤®à¥‡à¤¯ कहा जा सकता है। जहां वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿, वैचारिक पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤“ं से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ होकर, हमेशा अति सरलीकृत या गलत वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾ की गई कहानियों को दोहराया जाता है। à¤à¤¸à¥‡ में समय के साथ ये कहानियां जटिल हो जाती है और वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤•ता को पीछे छोड़ देती है।
à¤à¤¸à¤¾ ही कà¥à¤› राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¯à¤‚सेवक संघ के इरà¥à¤¦-गिरà¥à¤¦ चरà¥à¤šà¤¾à¤“ं में विशेष रूप से देखा गया है। जहां आलोचक अकà¥à¤¸à¤° हिंदू राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¦, हिंदà¥à¤¤à¥à¤µ या हिंदू दूर-दराज़ जैसे शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² उनके सांसà¥à¤•ृतिक और दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• संदरà¥à¤à¥‹à¤‚ को पूरी तरह समà¤à¥‡ बिना करते हैं। जो बाद में लोगों को गलत संदेश देते हैं।
बता दें, बार-बार की जाने वाली आलोचनाओं में से à¤à¤• यह है कि हिंदू राषà¥à¤Ÿà¥à¤° के RSS के दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण में अलà¥à¤ªà¤¸à¤‚खà¥à¤¯à¤•ों, विशेष रूप से मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ और ईसाइयों को हाशिठपर रखा गया है। हालांकि, à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• और समकालीन साकà¥à¤·à¥à¤¯ इसके विपरीत संकेत देते हैं। à¤à¤¾à¤°à¤¤ के जटिल इतिहास के बावजूद - जिसमें विदेशी आकà¥à¤°à¤®à¤£ और धारà¥à¤®à¤¿à¤• उतà¥à¤ªà¥€à¤¡à¤¼à¤¨ शामिल हैं। आरà¤à¤¸à¤à¤¸ और इसकी विचारधारा से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ सरकारों, विशेष रूप से à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ जनता पारà¥à¤Ÿà¥€ (BJP) ने इन समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ के खिलाफ à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ करने वाला कोई आधिकारिक या वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ रà¥à¤– नहीं अपनाया है।
आपको बता दें, केंदà¥à¤° सरकार के à¤à¤• दशक से अधिक के कारà¥à¤¯à¤•ाल में, अलà¥à¤ªà¤¸à¤‚खà¥à¤¯à¤•ों के खिलाफ कोई सामूहिक पलायन या लकà¥à¤·à¤¿à¤¤ सरकारी कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤ˆ दरà¥à¤œ नहीं की गई है, à¤à¤²à¥‡ ही कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ और वैशà¥à¤µà¤¿à¤• मीडिया à¤à¤¸à¥‡ घटनाकà¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ की बारीकी से जांच करता हो। अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ है आरà¤à¤¸à¤¸ के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की संखà¥à¤¯à¤¾ लगà¤à¤— 6 मिलियन पहà¥à¤‚च चà¥à¤•ी है। जो à¤à¤¾à¤°à¤¤ की जनसंखà¥à¤¯à¤¾ का 0.5% से à¤à¥€ कम है। फिर à¤à¥€ संगठन की आलोचना हमेशा होती रहती है।
आरà¤à¤¸à¤à¤¸ के बारे में सही मायने में जानकारीपूरà¥à¤£ संवाद में शामिल होने के लिà¤, सांसà¥à¤•ृतिक सापेकà¥à¤·à¤¤à¤¾à¤µà¤¾à¤¦ को अपनाना आवशà¥à¤¯à¤• है। हिंदà¥à¤¤à¥à¤µ और हिंदू राषà¥à¤Ÿà¥à¤° जैसे शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ को अकà¥à¤¸à¤° गलत समà¤à¤¾ जाता है। हिंदà¥à¤¤à¥à¤µ, जिसे 1892 में चंदà¥à¤°à¤¨à¤¾à¤¥ बसॠने गढ़ा था और बाद में विनायक दामोदर सावरकर ने अपने 1923 के निबंध à¤à¤¸à¥‡à¤‚शियलà¥à¤¸ ऑफ हिंदà¥à¤¤à¥à¤µ में लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ बनाया, हिंदू पहचान को केवल धरà¥à¤® से नहीं, बलà¥à¤•ि à¤à¤• सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤—त और सांसà¥à¤•ृतिक निरंतरता के रूप में परिà¤à¤¾à¤·à¤¿à¤¤ करता है। सावरकर ने हिंदू को किसी à¤à¥€ à¤à¤¸à¥‡ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के रूप में देखा, जिसके लिठसिंधॠनदी से लेकर हिंद महासागर तक फैली à¤à¥‚मि पैतृक मातृà¤à¥‚मि और पवितà¥à¤° à¤à¥‚गोल दोनों है।
महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ बात यह है कि राषà¥à¤Ÿà¥à¤° का मतलब सांसà¥à¤•ृतिक राषà¥à¤Ÿà¥à¤° है, जो राजà¥à¤¯ से अलग है, जो राजनीतिक शासन को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है। इस पà¥à¤°à¤•ार, आरà¤à¤¸à¤à¤¸ का हिंदू राषà¥à¤Ÿà¥à¤° का विचार सांसà¥à¤•ृतिक और सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤—त दायरे में है। बता दें, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में समावेशिता, रचनातà¥à¤®à¤•ता और लचीलेपन की à¤à¤• लंबी परंपरा रही है। इसने दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को ऋगà¥à¤µà¥‡à¤¦, शूनà¥à¤¯ की अवधारणा और आधà¥à¤¨à¤¿à¤• पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के आकार लेने से बहà¥à¤¤ पहले विजà¥à¤žà¤¾à¤¨, दरà¥à¤¶à¤¨ और शासन में उनà¥à¤¨à¤¤à¤¿ दी।
डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ 1925 में अपनी सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ के बाद से ही आरà¤à¤¸à¤à¤¸ ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ के सांसà¥à¤•ृतिक आतà¥à¤®à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸ को पà¥à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€à¤µà¤¿à¤¤ करने का लकà¥à¤·à¥à¤¯ रखा है। इसे लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है। अकà¥à¤¸à¤° इसे फासीवादी विचारधाराओं के बराबर माना जाता है। जबकि कोई तथà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• या कानूनी समानता नहीं है। यह गलत चितà¥à¤°à¤£ आंशिक रूप से आरà¤à¤¸à¤à¤¸ के पà¥à¤°à¤šà¤¾à¤° से बचने के लंबे समय से चले आ रहे सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त से उपजा है, जिसके कारण सूचना का अà¤à¤¾à¤µ होता है जिसे अकà¥à¤¸à¤° इसके आलोचक à¤à¤° देते हैं।
इसके बावजूद, संगठन ने शिकà¥à¤·à¤¾, सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯, आपदा राहत और गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ विकास के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में जमीनी सà¥à¤¤à¤° पर अपना सामाजिक कारà¥à¤¯ जारी रखा है। इसका पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ अब à¤à¤¾à¤°à¤¤ के सामाजिक-राजनीतिक ताने-बाने में तेज़ी से दिखाई दे रहा है - आकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤•ता के जरिठनहीं, बलà¥à¤•ि सांसà¥à¤•ृतिक à¤à¤•ीकरण और नागरिक जà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤µ के जरिठइसे देखा जा सकता है। अगर आलोचकों और परà¥à¤¯à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤•ों को आरà¤à¤¸à¤à¤¸ को सारà¥à¤¥à¤• रूप से समà¤à¤¨à¤¾ है, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वैचारिक पूरà¥à¤µà¤¾à¤—à¥à¤°à¤¹à¥‹à¤‚ को दरकिनार करते हà¥à¤, मानवशासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ तरीकों की तरह सहà¤à¤¾à¤—ी अवलोकन में संलगà¥à¤¨ होना चाहिà¤à¥¤ दतà¥à¤¤à¥‹à¤ªà¤‚त ठेंगड़ी जैसे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿, जो आरà¤à¤¸à¤à¤¸ के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ विचारक थे और जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी विचारधारा से समà¤à¥Œà¤¤à¤¾ किठबिना विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ विचारधाराओं के साथ काम किया, आज आवशà¥à¤¯à¤• संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण का उदाहरण हैं।
जैसे-जैसे à¤à¤¾à¤°à¤¤ आगे की ओर अगà¥à¤°à¤¸à¤° हो रहा है, आधà¥à¤¨à¤¿à¤•ता को अपनाते हà¥à¤ अपनी सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤—त जड़ों को पà¥à¤¨à¤ƒ खोज रहा है, राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤µà¤¯à¤‚सेवक संघ जैसे संगठनों के बारे में ईमानदार, पà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤‚गिक और समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤œà¤¨à¤• बातचीत पहले से कहीं अधिक आवशà¥à¤¯à¤• हो गई है, जिसे समà¤à¤¨à¤¾ बेहद जरूरी है।
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