रामà¥à¤¯à¤¾ रामकृषà¥à¤£à¤¨ : कà¥à¤› महीने पहले मैंने à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– यहूदी संगठन दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आयोजित 'सà¥à¤ªà¤°à¤¨à¥‹à¤µà¤¾: द मà¥à¤¯à¥‚जिक फेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤² नरसंहार' की à¤à¤• विशेष सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨à¤¿à¤‚ग देखी थी। दरà¥à¤¶à¤•ों ने कà¥à¤› पहले कà¤à¥€ नहीं देखे गठफà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ और इजरायली पीड़ितों के दिल दहला देने वाले साकà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤•ार देखे। इन पीड़ितों में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° महिलाà¤à¤‚ पोरà¥à¤Ÿà¥‡à¤¬à¤² शौचालयों और बम से बचने के लिठबनाठगठशेलà¥à¤Ÿà¤° में छिपी हà¥à¤ˆ थीं। जो किसी तरह गोलियों की बौछार से बच निकलीं और जीवित रहकर उन à¤à¤¯à¤¾à¤µà¤¹à¤¤à¤¾à¤“ं को बता सकीं।
हमले के विवरण ने सà¤à¥€ को à¤à¤•à¤à¥‹à¤° कर रख दिया। लगà¤à¤— à¤à¤• घंटे के लिठहम मानसिक तौर पर घटनासà¥à¤¥à¤² पर पहà¥à¤‚च गठऔर इसà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ आतंकवाद और नफरत के सबसे बà¥à¤°à¥‡ रूप का अनà¥à¤à¤µ किया। 7 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर से इजरायली महिलाओं और लड़कियों को निशाना बनाकर हमास दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किठगठबलातà¥à¤•ार, यौन हिंसा और अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤° मानवाधिकारों का असà¥à¤µà¥€à¤•ारà¥à¤¯ उलà¥à¤²à¤‚घन है। फिर à¤à¥€, आप देखेंगे कि बहà¥à¤¤ सी महिला à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ इन अपराधों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रही हैं। इससे à¤à¥€ बà¥à¤°à¤¾ ये है कि वे आतंकवादी समूहों और उनके विचारधाराओं के साथ सहानà¥à¤à¥‚ति रखती हैं।
खासकर à¤à¤• महिला होने के नाते यह देखना बहà¥à¤¤ निराशाजनक है कि कई महिलाà¤à¤‚ और महिला-नेतृतà¥à¤µ वाले समूह इन कà¥à¤°à¥‚रताओं को अनदेखा करना पसंद करते हैं। बलातà¥à¤•ार और यौन हिंसा जैसी गंà¤à¥€à¤° घटनाओं को कम करके आंकना और इसे 'फेमिनिसà¥à¤Ÿ' कहलाने वाले लोगों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया जाना बेहद शरà¥à¤®à¤¨à¤¾à¤• है। यह सच है कि जब महिलाà¤à¤‚ à¤à¤•-दूसरे का समरà¥à¤¥à¤¨ नहीं करती हैं, खासकर गंà¤à¥€à¤° मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ पर, तो यह समाज के लिठà¤à¤• बड़ी समसà¥à¤¯à¤¾ होती है। हर महिला को, चाहे उसका राजनीतिक à¤à¥à¤•ाव या धरà¥à¤® कà¥à¤› à¤à¥€ हो, इस तरह की हिंसा के खिलाफ खड़ा होना चाहिठऔर à¤à¤•-दूसरे के साथ à¤à¤•जà¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ दिखानी चाहिà¤à¥¤
आपके परवरिश में आपको आजादी और समानता के मूलà¥à¤¯ मिले, जो à¤à¤• बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¥€ बात है। à¤à¤¸à¤¾ माहौल आपको आज इतना मजबूत बनाता है कि आप इन सचà¥à¤šà¤¾à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚ को खà¥à¤²à¥‡ मन से देख सकती हैं और इस बारे में आवाज उठा सकती हैं। मैं उन à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¥€ महिलाओं में से à¤à¤• हूं जिनका पालन-पोषण à¤à¤¸à¥‡ परिवार में हà¥à¤† जहां लड़कियों को बहà¥à¤¤ अधिक आजादी मिलती थी। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के बराबर माना जाता था। वासà¥à¤¤à¤µ में कई मामलों में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ निरà¥à¤£à¤¯ लेने के अधिक अधिकार थे।
जब मैं छोटी थी और किशोरी थी, तब मैं अपने आस-पास की महिला लीडरà¥à¤¸ से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ थी। अपने परिवार में, अपने सà¥à¤•ूल में और अपने शहर में, राजनीति में à¤à¥€à¥¤ इन रोल मॉडल के कारण लड़की होने के नाते और बाद में महिला होने के नाते अपने अधिकारों के लिठखड़ा होना मेरे लिठसà¥à¤µà¤¾à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤• था। मà¥à¤à¥‡ बचाव करना, उठना या नेतृतà¥à¤µ करना सिखाया नहीं गया।
जब मैं थिà¤à¤Ÿà¤° से बाहर निकली तो मैंने सोचा कि आज फिलिसà¥à¤¤à¥€à¤¨ की आजादी की मांग करने वाले रैलियों का आयोजन करने वाली इन महिला कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾à¤“ं में से कितनी इरानी महिलाओं और पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ का समरà¥à¤¥à¤¨ करती हैं। जब उनकी ही महिला महसा अमीनी को जबरन हिजाब पहनने का विरोध करने पर पà¥à¤²à¤¿à¤¸ हिरासत में मौत के घाट उतार दिया गया था? इस बरà¥à¤¬à¤° कृतà¥à¤¯ के बाद लगà¤à¤— 600 निरà¥à¤¦à¥‹à¤· लोगों की मौत हà¥à¤ˆà¥¤ फिर à¤à¥€ जो समूह आमतौर पर हमास जैसे आतंकवादी समूहों का समरà¥à¤¥à¤¨ करते हà¥à¤ कॉलेज कैंपसों में डेरा डाले रहते हैं, वे à¤à¤¸à¥€ कà¥à¤°à¥‚रताओं से अनजान बने रहते हैं! यह दोगलापन ही तो है!
अगर आप सोच रहे हैं कि ये तथाकथित नारीवादी कहां हैं जब पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨ में नाबालिग हिंदू लड़कियों का अपहरण, बलातà¥à¤•ार अकà¥à¤¸à¤° उनकी उमà¥à¤° से दोगà¥à¤¨à¥€ या तिगà¥à¤¨à¥€ उमà¥à¤° के पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ हर रोज किया जाता है। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ धमकाया जाता है। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जबरन इसà¥à¤²à¤¾à¤® में परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ किया जाता है। तो आप इन नारीवादी à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ को शहर काउंसिल की बैठकों में चà¥à¤¨à¥‡ हà¥à¤ अधिकारियों से नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ की मांग करते हà¥à¤ चिलà¥à¤²à¤¾à¤¤à¥‡ हà¥à¤ नहीं पाà¤à¤‚गे। आप उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ फà¥à¤°à¥€à¤µà¥‡ बà¥à¤²à¥‰à¤• करते हà¥à¤ या शैकà¥à¤·à¤£à¤¿à¤• संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ में विरोध पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ करते हà¥à¤ à¤à¥€ नहीं देखेंगे। आप निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रूप से महिला रिपोरà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ को इन à¤à¤¯à¤¾à¤µà¤¹ कहानियों की जांच करते और रिपोरà¥à¤Ÿ करते हà¥à¤ नहीं पाà¤à¤‚गे जहां पीड़ित हिंदू परिवार अपनी बेटियों के लिठरो रहे हैं और मदद के लिठà¤à¤—वान से विनती कर रहे होते हैं।
सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ यह है कि हिंदू लड़कियों और उनकी दà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ नहीं है। चाहे कशà¥à¤®à¥€à¤° हो, बांगà¥à¤²à¤¾à¤¦à¥‡à¤¶ हो या पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥¤ इन तमाम जगहों पर हिंदू महिलाओं का सबसे à¤à¤¯à¤¾à¤µà¤¹ तरीकों से यौन शोषण, बलातà¥à¤•ार और उनपर हमला किया गया है और अà¤à¥€ à¤à¥€ किया जा रहा है। कई मामलों में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मरने के लिठछोड़ दिया जाता है। फिर à¤à¥€, दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° में इन मानवाधिकारों के इसे नजरअंदाज किया गया है। चà¥à¤ªà¥à¤ªà¥€ साध ली गई है। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ उजागर करने का काम हिंदू संगठनों और कà¥à¤› वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर छोड़ दिया गया है। अकà¥à¤¸à¤°, à¤à¤¸à¥‡ कृतà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के खिलाफ आवाज को उठाने के लिठहिंदà¥à¤“ं को संगठित पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§ और हिंदू-विरोधी नफरत का सामना करना पड़ता है। हिंदू महिला वकीलों को नियमित रूप से पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤¡à¤¼à¤¿à¤¤ किया जाता है और सच साà¤à¤¾ करने से रोका जाता है।
जो लोग जागरूकता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इन छदà¥à¤® महिला अधिकार कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾à¤“ं, नीति निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾à¤“ं और पतà¥à¤°à¤•ारों से दो पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤‚ देखी हैं। पहला, इन अपराधों के असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ को नकारना, à¤à¤²à¥‡ ही आपके पास ठोस डेटा और वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• रिपोरà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚ हों जो इन अपराधों का दसà¥à¤¤à¤¾à¤µà¥‡à¤œà¥€à¤•रण करती हों। दूसरा, इन अपराधों को पूरी तरह से नजरअंदाज करना और जानबूà¤à¤•र उनसे बचना। जब तक हम सà¤à¥€ महिलाओं के जीवन को समान नहीं मानते और यह सà¥à¤µà¥€à¤•ार नहीं करते कि सà¤à¥€ लड़कियों और महिलाओं में, खासकर उन बेबस महिलाओं में जिनकी कोई आवाज नहीं है, ईशà¥à¤µà¤° का वास है, तब तक हम अपनी पूरी कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ का à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¸ नहीं कर सकते हैं और बड़ी चीजें हासिल नहीं कर सकते हैं।
(लेखिका रामà¥à¤¯à¤¾ रामकृषà¥à¤£à¤¨ हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन (HAF) में कमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ आउटरीच की डायरेकà¥à¤Ÿà¤° हैं। वह मानती हैं कि समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के लिठनिसà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥ सेवा ही सेवा का सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š रूप है। वह सही के लिठखड़े होने और सचà¥à¤šà¤¾à¤ˆ से पीछे न हटने में विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करती हैं। पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ आलेख लेखिका के निजी विचार हैं)
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login