कशà¥à¤®à¥€à¤°à¥€ पंडित बड़े उलà¥à¤²à¤¾à¤¸ के साथ नवरेह (कशà¥à¤®à¥€à¤°à¥€ हिंदू नववरà¥à¤·) मनाते हैं। यह तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° देवी शारिका को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ होता है। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कशà¥à¤®à¥€à¤° की देवी और रकà¥à¤·à¤• माना जाता है। देवी शारिका की पूजा शà¥à¤°à¥€à¤¨à¤—र के हरि परà¥à¤µà¤¤ (शारिका पीठ) पर की जाती है। इस मौके पर शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥ देवी से सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯, सफलता और शांति की कामना करते हैं। वे शà¥à¤²à¥‹à¤• और वैदिक मंतà¥à¤°à¥‹à¤‚ का पाठकरते हैं ताकि जीवन में बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ और सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ बनी रहे।
नवरेह का तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° मौसम के बदलाव का à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। यह कशà¥à¤®à¥€à¤° की कड़ी सरà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से निकलकर रंगीन और चहकते बसंत के सà¥à¤µà¤¾à¤—त का समय है – यानी पà¥à¤°à¤•ृति के नठजीवन का जशà¥à¤¨à¥¤ कशà¥à¤®à¥€à¤°à¥€ पंडित अपने घरों को गंगाजल से शà¥à¤¦à¥à¤§ करते हैं और दीप जलाते हैं ताकि घर में सकारातà¥à¤®à¤• ऊरà¥à¤œà¤¾ बनी रहे।
नवरेह से à¤à¤• दिन पहले परिवार का पà¥à¤œà¤¾à¤°à¥€ à¤à¤• धारà¥à¤®à¤¿à¤• पंचांग या नेचीपतà¥à¤°à¤¾ लाता है, जिसमें आने वाले साल की जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤·à¥€à¤¯ जानकारी होती है। यह समय धà¥à¤¯à¤¾à¤¨, नठकाम शà¥à¤°à¥‚ करने और सही मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ पाने के लिठशà¥à¤ माना जाता है।
इस दिन à¤à¤• पारंपरिक थाली सजाई जाती है। जिसमें चावल, पंचांग (नेचीपतà¥à¤°), ताजे और सूखे फूल, दूध, दही, नई घास, वाय (à¤à¤• कड़वी जड़ी-बूटी), अखरोट, कलम, दवात, कागज, सिकà¥à¤•े, नमक, पका हà¥à¤† चावल, रोटी, शहद और à¤à¤• छोटा आइना रखा जाता है। मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि चावल और सिकà¥à¤•े रोजी-रोटी और समृदà¥à¤§à¤¿ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• हैं। कलम और कागज पढ़ाई और जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की इचà¥à¤›à¤¾ और आइना आतà¥à¤®à¤šà¤¿à¤‚तन का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। कड़वी जड़ी-बूटी जीवन के कड़वे अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ का संकेत देती है।
नवरेह के दिन कशà¥à¤®à¥€à¤°à¥€ पंडित नठकपड़े पहनते हैं, खास पकवान बनाते हैं और रिशà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ व दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ से मिलते हैं।
खास पकवान
इस खास मौके पर कई पारंपरिक कशà¥à¤®à¥€à¤°à¥€ पकवान – दम आलू (मसालेदार आलू), मोदà¥à¤° पà¥à¤²à¤¾à¤µ (मीठा केसरिया चावल), ताहर (हलà¥à¤¦à¥€ और घी वाला पीला चावल), और नदà¥à¤°à¥‚ यखनी (दही की गà¥à¤°à¥‡à¤µà¥€ में कमल ककड़ी) बनाठजाते हैं । इनमें सबसे लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ डिश है कशà¥à¤®à¥€à¤°à¥€ पà¥à¤²à¤¾à¤µà¥¤ यहां इसकी आसान रेसिपी दी गई है –
4 कप बासमती चावल
चीनी
½ कप घी
साबà¥à¤¤ इलायची, लौंग, काली मिरà¥à¤š, दालचीनी और तेजपतà¥à¤¤à¤¾
1 छोटा चमà¥à¤®à¤š केसर
1 कप बादाम (छिले और कटे), किशमिश, सूखे नारियल के टà¥à¤•ड़े और सूखे खजूर
¾ कप मिशà¥à¤°à¥€ (अगर चाहें तो)
बनाने का तरीका :
चावल को धोकर पानी निकाल लें और अलग रख दें। à¤à¤• बड़े पैन में करीब 16 कप पानी उबालें। इसमें चावल डालें। जब पानी अचà¥à¤›à¥‡ से उबल जाठऔर चावल करीब ¾ पक जाà¤, तो पानी छानकर चावल अलग रख लें। केसर को थोड़े से पानी या दूध में à¤à¤¿à¤—ोकर मसल लें।
अब à¤à¤• कढ़ाई में घी गरम करें, उसमें सारे साबà¥à¤¤ मसाले (केसर छोड़कर) डालें। मसाले à¤à¥à¤¨ जाà¤à¤‚ तो उसमें चीनी डालें, और ½ से ¾ कप पानी डालें। इसे उबालें, जिससे à¤à¤• गाढ़ा सिरप बन जाà¤à¥¤ अब इसमें सारे सूखे मेवे डालें। थोड़ा चलाà¤à¤‚ और उसमें उबला हà¥à¤† चावल डाल दें। धीरे-धीरे मिलाà¤à¤‚ ताकि सिरप और मेवे चावल में अचà¥à¤›à¥‡ से मिल जाà¤à¤‚। अब केसर का पानी डालें। अगर आप चाहें तो रंग के लिठकेसर को सिरप में ही डाल सकते हैं। आखिर में मिशà¥à¤°à¥€ à¤à¥€ डाल सकते हैं (ये आपकी पसंद पर है)।
ढकà¥à¤•न लगाकर धीमी आंच पर à¤à¤• घंटे तक पकाà¤à¤‚। पकने के बाद चावल के दाने हलà¥à¤•े से अलग करें। फिर गरमा-गरम मेहमानों को परोसें।
नवरेह की शà¥à¤à¤•ामनाà¤à¤‚।
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