दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में आजकल योग की बहà¥à¤¤ चरà¥à¤šà¤¾ है। इसके फायदे को देखते हà¥à¤ आज हर कोई इसे अपनाना और जीवन का हिसà¥à¤¸à¤¾ बनाना चाहता है। लेकिन शायद इस बात से कम लोग ही परिचित होंगे कि हर पà¥à¤°à¤•ार के योग का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करने का अंतिम उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ या धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ की अवसà¥à¤¥à¤¾ को पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करना है। कोई पूछ सकता है कि 'धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में कà¥à¤¯à¤¾ है? आप अपनी आà¤à¤–ें बंद करते हैं, अपने शरीर को सà¥à¤¥à¤¿à¤° करते हैं। कà¥à¤› और नहीं विचार करना है। इसलिठलोग समà¤à¤¤à¥‡ हैं कि इसे हर कोई कर सकता है। इसलिठलोग सोचते हैं कि धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ के बारे में कà¥à¤› à¤à¥€ जानना आवशà¥à¤¯à¤• नहीं है।
जैसे आप अपने शरीर को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने के लिठयोगासन का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करते हैं, उसी तरह योग में मन पर नियंतà¥à¤°à¤£ रखने की अवधारणा है। मन को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करना ऊरà¥à¤œà¤¾ के पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¹ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करना है। मन à¤à¤• पà¥à¤°à¤•ार की ऊरà¥à¤œà¤¾ है। सोचना मन नहीं है, à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ मन नहीं है, सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ मन नहीं है। वे मन के पहलू हैं। जैसे बलà¥à¤¬ बिजली नहीं है, पंखा बिजली नहीं है, à¤à¤¯à¤° कंडीशनर बिजली नहीं है, वे बिजली से चलते हैं। बलà¥à¤¬, पंखा और à¤à¤¯à¤° कंडीशनर, माइकà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‹à¤¨, रेडियो, टेलीविजन बिजली से चलते हैं। इसी तरह हमारे à¤à¥€à¤¤à¤° à¤à¤• ऊरà¥à¤œà¤¾ होती है, जिसे मन कहा जाता है।
यह ऊरà¥à¤œà¤¾ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ संसà¥à¤•ारों, आदतों या जागरूकता के माधà¥à¤¯à¤® से पà¥à¤°à¤•ट हो रही है, जैसे à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾, सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿, कà¥à¤°à¥‹à¤§à¥¤ इस ऊरà¥à¤œà¤¾ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ करना ही योग साधना है। मनà¥à¤·à¥à¤¯ ने अब तक इस ऊरà¥à¤œà¤¾ को वश में नहीं किया है। वे नहीं जानते कि इसे कैसे वश में किया जाà¤à¥¤ इस ऊरà¥à¤œà¤¾ को वश में करने के लिठसबसे पहले आपको à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• शरीर में बहने वाली इस ऊरà¥à¤œà¤¾ के चैनल का पता लगाना होगा। और धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ यहीं से होती है।
योग के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° जो à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¥‹à¤‚ को कई हजार वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से जà¥à¤žà¤¾à¤¤ हैं, रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ के à¤à¥€à¤¤à¤° तीन नाड़ियां बहती हैं। उनमें से à¤à¤• इस पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤• ऊरà¥à¤œà¤¾ को वितरित करने, संचालित करने और ले जाने के लिठजिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤° है। इसे पिंगला नाड़ी के रूप में जाना जाता है। यह रीढ़ की हडà¥à¤¡à¥€ के दाईं ओर बहती है और बाईं ओर इड़ा नाड़ी है, जो मानस, चितà¥à¤¤ या जागरूकता की मानसिक ऊरà¥à¤œà¤¾ का मà¥à¤–à¥à¤¯ चालक है। इसे वश में करने के लिà¤, अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करने के कई तरीके हैं।
à¤à¤• है पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® का तरीका, दूसरा है धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ योग का तरीका। बहà¥à¤¤ से लोग सोचते हैं कि धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ बहà¥à¤¤ आसान है, लेकिन à¤à¤¸à¤¾ नहीं है। जब आप उचित तैयारी के बिना धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ करते हैं, तो आप शरीर में होने वाले परिवरà¥à¤¤à¤¨à¥‹à¤‚ को नियंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ नहीं कर सकते हैं। जब आप धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करते हैं, तो आपको कà¥à¤› चीजें याद रखनी चाहिà¤à¥¤ सबसे पहले, शरीर का तापमान अचानक नहीं गिरना चाहिà¤à¥¤
मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• की तरंगों को बहà¥à¤¤ तेजी से नहीं बदलना चाहिà¤à¥¤ इसमें सांस रà¥à¤• जाती है, और यह बहà¥à¤¤ मà¥à¤¶à¥à¤•िल अवसà¥à¤¥à¤¾ होती है। बहà¥à¤¤ से लोग समठनहीं पाते कि कà¥à¤¯à¤¾ हो रहा है। जब सांस रà¥à¤• जाती है, तो आपके पास बहà¥à¤¤ सारे दरà¥à¤¶à¤¨ और संवेदनाà¤à¤‚ होती हैं। कà¤à¥€-कà¤à¥€ लोग समठनहीं पाते कि उनके साथ कà¥à¤¯à¤¾ हो रहा है। इसलिठजब आप धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ करते हैं, तो आपके पास à¤à¤• पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ होनी चाहिà¤, और उस पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ को योग में सिखाया जाता है। इसलिठइसे किसी गà¥à¤°à¥ के साथ ही सीखा जा सकता है।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login