सà¥à¤à¤¾à¤· राजदान à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ शखà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤¤ हैं जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सामाजिक अपेकà¥à¤·à¤¾à¤“ं को धता बताया और अपनी पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€ पतà¥à¤¨à¥€ राज कौल के सपोरà¥à¤Ÿ के साथ अपने रासà¥à¤¤à¥‡ में आने वाली हर चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का सामना किया और अवसर का अधिकतम लाठउठाया। राज कौल à¤à¤• वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन अमेरिकन à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ (à¤à¤¨à¤à¤«à¤†à¤ˆà¤) के वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· हैं। राजदान के लचीलापन और अटूट दृढ़ संकलà¥à¤ª की उनकी अविशà¥à¤µà¤¸à¤¨à¥€à¤¯ यातà¥à¤°à¤¾ निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रूप से आपको पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ करेगी। आइठउनके बारे में जानते हैं।
डॉ. राजदान को उनके योगदान के लिठकई पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार मिले हैं। 2013 में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मानवता की सेवा के लिठअनिवासी à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठà¤à¤¾à¤°à¤¤ का सरà¥à¤µà¥‹à¤šà¥à¤š , पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ समà¥à¤®à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार मिला। 2003 में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤²à¤¿à¤¸ दà¥à¤µà¥€à¤ª मेडल ऑफ ऑनर मिला (छह से अधिक अमेरिकी राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ इस पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार के पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤•रà¥à¤¤à¤¾ हैं)। 22 फरवरी को जॉरà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾ में सà¥à¤à¤¾à¤· राजदान दिवस कहा जाता है। राजदान ने 1996 के अटलांटा ओलंपिक के दौरान à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ ओलंपिक के लिठयोगदान दिया।
वह à¤à¤• अमेरिकी नागरिक हैं। वह अपनी पतà¥à¤¨à¥€, दो बेटों, बहू और छह पोते-पोतियों के साथ 48 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से जॉरà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾ में रह रहे हैं। लेकिन उनका दिल अà¤à¥€ à¤à¥€ अपनी मातृà¤à¥‚मि à¤à¤¾à¤°à¤¤ के लिठधड़कता है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¾à¤°à¤¤-जॉरà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾ मैतà¥à¤°à¥€ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ का मसौदा तैयार किया, जिसे जॉरà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾ सीनेट पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ 1248 के रूप में पारित किया गया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कोका-कोला कंपनी के सलाहकार के रूप में à¤à¥€ काम किया। à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯-अमेरिकी मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ की वकालत करने और à¤à¤¾à¤°à¤¤-अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों को बढ़ावा देने में उनके दूरदरà¥à¤¶à¥€ नेतृतà¥à¤µ ने सकारातà¥à¤®à¤• बदलाव को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया है।
उनकी उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय उपलबà¥à¤§à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ की बेहतरी के लिठअटूट पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¦à¥à¤§à¤¤à¤¾ हम सà¤à¥€ के लिठआशा और पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ की किरण के रूप में काम करती है। जमà¥à¤®à¥‚-कशà¥à¤®à¥€à¤° में सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ शांति और समृदà¥à¤§à¤¿ को बढ़ावा देने के लिठवह पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¦à¥à¤§ हैं। à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में उनका उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ सà¤à¥€ के लिठमानवीय गरिमा पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ करने के साथ गांधी-किंग सेंटर सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करना है।
मूल रूप से शà¥à¤°à¥€à¤¨à¤—र से लगà¤à¤— 10 मील दूर बडगाम के रहने वाले राजदान के माता-पिता 1947 में बड़े पैमाने पर कबिलाई घà¥à¤¸à¤ªà¥ˆà¤ के कारण कशà¥à¤®à¥€à¤° में अशांति पैदा होने के बाद दिलà¥à¤²à¥€ चले गà¤à¥¤ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ किला, इंदà¥à¤°à¤ªà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥ में टेंट में रहते हà¥à¤ राजदान के पिता पी.à¤à¤¨. राजदान ने à¤à¤®à¤ और कानून की डिगà¥à¤°à¥€ हासिल की थी। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सà¥à¤µà¥ˆà¤šà¥à¤›à¤¿à¤• रूप से शरणारà¥à¤¥à¥€ पà¥à¤¨à¤°à¥à¤µà¤¸à¤¨ अधिकारी के रूप में नौकरी ली।
उनके समरà¥à¤ªà¤£ ने शà¥à¤°à¤® मंतà¥à¤°à¥€ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ किया, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शà¥à¤°à¤® मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ में à¤à¤• पद की पेशकश की। इसके बाद उनके उलà¥à¤²à¥‡à¤–नीय करियर की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ हà¥à¤ˆà¥¤ पी.à¤à¤¨. राजदान के लगातार तबादलों ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अलग-अलग शहरों में रहना पड़ा। सà¥à¤à¤¾à¤· के पिता ने अपने करियर में बहà¥à¤¤ अचà¥à¤›à¤¾ काम किया और à¤à¤¾à¤°à¤¤ के मà¥à¤–à¥à¤¯ शà¥à¤°à¤® आयà¥à¤•à¥à¤¤ के पद तक पहà¥à¤‚चे। सà¥à¤à¤¾à¤· राजदान का जनà¥à¤® तब हà¥à¤† था जब उनके पिता अहमदाबाद में तैनात थे। उस समय को याद करते हà¥à¤ वह मजाक में कहते हैं कि 'जनà¥à¤® से मैं à¤à¤• गà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤à¥€ हूं, लेकिन मेरा वंश कशà¥à¤®à¥€à¤°à¥€ है।'
सà¥à¤à¤¾à¤· राजदान ने बॉमà¥à¤¬à¥‡ से à¤à¤¸à¤à¤¸à¤¸à¥€ पूरा किया और उसके बाद जय हिंद कॉलेज, चरà¥à¤šà¤—ेट में पà¥à¤°à¤¥à¤® वरà¥à¤· का विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ किया। फिर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित आईआईटी-दिलà¥à¤²à¥€ में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ लिया। हालांकि इससे पहले कई नाटकीय घटनाकà¥à¤°à¤®à¥‹à¤‚ से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गà¥à¤œà¤°à¤¨à¤¾ पड़ा। वह आईआईटी-जेईई परीकà¥à¤·à¤¾ के लिठउपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हà¥à¤à¥¤ कà¥à¤› दोसà¥à¤¤à¥‹à¤‚ के साथ वे दूसरे पेपर के लिठतय समय से 20 मिनट देरी से परीकà¥à¤·à¤¾ सà¥à¤¥à¤² पर पहà¥à¤‚चे। पहला पेपर फिजिकà¥à¤¸ का था और उसके बाद केमिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ का पेपर आया।
दरअसल, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤• फिलà¥à¤® देखने का फैसला किया। लेकिन à¤à¤¾à¤°à¤¤ के तीसरे राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ डॉ जाकिर हà¥à¤¸à¥ˆà¤¨ के निधन के कारण सिनेमाघर बंद था। अंततः वे लौट आठऔर बाकी सà¤à¥€ परीकà¥à¤·à¤¾à¤“ं के लिठबैठगà¤à¥¤ अपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤¶à¤¿à¤¤ रूप से, डॉ. राजदान ने सà¤à¥€ परीकà¥à¤·à¤¾ पास कर लिठथे।
आईआईटी-दिलà¥à¤²à¥€ से सिविल इंजीनियरिंग में सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤• करने के बाद राजदान ने पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ कशà¥à¤®à¥€à¤°à¥€ बिलà¥à¤¡à¤° पीà¤à¤¨ कौल की बेटी राज कौल से शादी की। उस दौरान 60% से 70% आईआईटी लोगों का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ शीरà¥à¤· अमेरिकी विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯à¥‹à¤‚ में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ करना था। लेकिन बहà¥à¤¤ चिंतन के बाद, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इस विचार को तà¥à¤¯à¤¾à¤— दिया और जय इंजीनियरिंग लिमिटेड (शà¥à¤°à¥€à¤°à¤¾à¤® समूह) के साथ अपनी कॉरपोरेट यातà¥à¤°à¤¾ शà¥à¤°à¥‚ करने का फैसला किया। लेकिन कà¥à¤› दिलचसà¥à¤ª घटनाओं ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
वह याद करते हैं कि शादी के बाद दिलà¥à¤²à¥€ लौटते हà¥à¤ मैं जॉरà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ के पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° नॉरà¥à¤®à¤¨ डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥‡à¤² के बगल वाली सीट पर बैठा था। बातचीत के बीच पà¥à¤°à¥‹. डà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥‡à¤² ने मेरी à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ की आकांकà¥à¤·à¤¾à¤“ं के बारे में पूछताछ की और सà¥à¤à¤¾à¤µ दिया कि मैं अमेरिका में आगे के अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ पर विचार करूं। जब मैंने अपनी वितà¥à¤¤à¥€à¤¯ सीमाओं के बारे में बताया, तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने मेरे जीमैट सà¥à¤•ोर के बारे में पूछा। फिर जॉरà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ के लिठà¤à¤• आवेदन के साथ मà¥à¤à¥‡ सहायता की पेशकश की।
जॉरà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾ सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ में जगह मिलने के बाद राजदान à¤à¤®à¤¬à¥€à¤ के लिठचले गà¤à¥¤ लेकिन à¤à¤• विदेशी धरती पर अलग तरह की चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ सामने आईं। à¤à¤• शानदार अकादमिक रेकॉरà¥à¤¡ के बावजूद राजदान ने संयà¥à¤•à¥à¤¤ राजà¥à¤¯ अमेरिका में 1978-80 की मंदी के दौरान मैनेजमेंट की नौकरी खोजने के लिठसंघरà¥à¤· किया। निराश होकर उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ लौटने का फैसला किया। तब à¤à¤• पाकिसà¥à¤¤à¤¾à¤¨à¥€ दोसà¥à¤¤ ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने रिजà¥à¤¯à¥‚मे से à¤à¤®à¤¬à¥€à¤ और उचà¥à¤š जीपीठके किसी à¤à¥€ उलà¥à¤²à¥‡à¤– को हटाने की सलाह दी।
इस परिवरà¥à¤¤à¤¨ के बाद उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कई इंजीनियरिंग नौकरी के पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¤¾à¤µ मिले। मंदी और गà¥à¤°à¥€à¤¨ कारà¥à¤¡ चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के बावजूद, राजदान इंजीनियरिंग साइंस में नौकरी के साथ उतरे। इसके बाद 1979 में गà¥à¤°à¥€à¤¨ कारà¥à¤¡ हासिल किया। वह याद करते हैं कि गà¥à¤°à¥€à¤¨ कारà¥à¤¡ मिलने के बाद मैं सबसे पहले अपने बेटे राहà¥à¤² को देखने के लिठà¤à¤¾à¤°à¤¤ लौटा (उसे मैं पहली बार देख रहा था, और वह तब तक तीन साल का हो चà¥à¤•ा था)।
अमेरिका में बसने और उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ करने के बाद, डॉ. राजदान ने अपनी मातृà¤à¥‚मि के लिठयोगदान दिया। डॉ. राजदान ने गांधी-किंग के शांति और अहिंसा के दरà¥à¤¶à¤¨ को बढ़ावा देने के लिठयूà¤à¤¸à¤ के गांधी फाउंडेशन की सह-सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की। वह अपने साथी गांधीवादी और जाने-माने समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ के दिगà¥à¤—ज दिवंगत शà¥à¤°à¥€ गिरिराज राव को याद करते हैं, जो फाउंडेशन की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ के पीछे पहली पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤“ं में से à¤à¤• थे। वह अपनी पहल को आगे बढ़ाने में संयà¥à¤•à¥à¤¤ राजà¥à¤¯ अमेरिका में ततà¥à¤•ालीन à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ राजदूत, पीके कौल के सपोरà¥à¤Ÿ को à¤à¥€ सà¥à¤µà¥€à¤•ार करते हैं।
डॉ. राजदान ने गांधीगà¥à¤°à¤¾à¤® गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ (जीआरयू), डिंडीगà¥à¤², तमिलनाडà¥, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में द गांधी-किंग सेंटर के लॉनà¥à¤š को पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤¿à¤¤ किया। à¤à¤¨à¤à¤«à¤†à¤ˆà¤ के अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· के रूप में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अटलांटा में महातà¥à¤®à¤¾ गांधी की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ का नेतृतà¥à¤µ और बीड़ा उठाया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कारगिल सेना के परिवार कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ के लिठधन जà¥à¤Ÿà¤¾à¤¯à¤¾ और à¤à¥‚कंप के दौरान लातूर में à¤à¤• हाई सà¥à¤•ूल के लिठà¤à¥€ सहायता की।
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