आज अगर जीवित होते तो फिलà¥à¤® निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ तपन सिनà¥à¤¹à¤¾ 2 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर को 100 साल पूरे कर चà¥à¤•े होते और बीते 11 दिसंबर को दिलीप कà¥à¤®à¤¾à¤° à¤à¥€ 102 साल के हो गठहोते। अलबतà¥à¤¤à¤¾, दोनों दिगà¥à¤—जों में से कोई à¤à¥€ आज हमारे साथ नहीं है। लेकिन उनकी 1970 की बंगाली फिलà¥à¤® सगीना महतो (बà¥à¤²à¥ˆà¤•-वà¥à¤¹à¤¾à¤‡à¤Ÿ) उस जादू की याद दिलाती है जो दोनों ने मिलकर रचा था।
140 मिनट की यह फिलà¥à¤® 1942-43 के शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤• आंदोलन पर आधारित है, जिसे कालà¥à¤ªà¤¨à¤¿à¤• पातà¥à¤°à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ किया गया है। इसमें यह उजागर किया गया है कि कैसे कमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿ नेता बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ तानाशाहों के साथ मिलकर शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों को उनके खिलाफ खड़ा करके उनके बीच अशांति को दबाने के लिठकाम कर रहे थे। पतà¥à¤°à¤•ार गौर किशोर घोष दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ रूपदरà¥à¤¶à¥€ उपनाम से लिखी गई इसी नाम से लघॠकहानी पहली बार 18 जनवरी, 1958 को देश में पà¥à¤°à¤•ाशित हà¥à¤ˆ थी। सिनà¥à¤¹à¤¾ ने पतà¥à¤°à¤•ार रोबी बसॠको सूचित किया कि हेमेन गांगà¥à¤²à¥€ ने उनके लिठà¤à¤• फिलà¥à¤® बनाने के लिठउनसे संपरà¥à¤• किया था।
दिलीप कà¥à¤®à¤¾à¤° ही कà¥à¤¯à¥‹à¤‚...
बहरहाल, कई लोगों ने सोचा होगा कि बंगाल के मैटिनी आइडल उतà¥à¤¤à¤® कà¥à¤®à¤¾à¤° सगीना के लिठअपरिहारà¥à¤¯ पसंद होंगे लेकिन सिनà¥à¤¹à¤¾ और गांगà¥à¤²à¥€ दोनों इस बात पर सहमत थे कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¤¾ की जरूरत है जो बंगाली न हो। तब उनके पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¥à¤¯à¥‚सर ने ही दिलीप कà¥à¤®à¤¾à¤° का नाम सà¥à¤à¤¾à¤¯à¤¾ था। अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¤¾ (दिलीप कà¥à¤®à¤¾à¤°) ने जगनाथ चटà¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯ की 1966 की बंगाली फिलà¥à¤® परी में à¤à¤• जेलर के रूप में विशेष à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤ˆ थी, जिसमें उनके सह-कलाकार धरà¥à¤®à¥‡à¤‚दà¥à¤°, अà¤à¤¿ à¤à¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ और पà¥à¤°à¤£à¤¤à¤¿ à¤à¤Ÿà¥à¤Ÿà¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ थे।
गांगà¥à¤²à¥€ अपने निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• के साथ मà¥à¤‚बई à¤à¥€ गठजहां à¤à¤• कॉमन फà¥à¤°à¥‡à¤‚ड के माधà¥à¤¯à¤® से दिलीप कà¥à¤®à¤¾à¤° के साथ à¤à¤• बैठक तय की गई। दिलीप कà¥à¤®à¤¾à¤° जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बंकिम चंदà¥à¤° चटà¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯, रवीनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¨à¤¾à¤¥ टैगोर और शरत चंदà¥à¤° चटà¥à¤Ÿà¥‹à¤ªà¤¾à¤§à¥à¤¯à¤¾à¤¯ की कृतियां विशेष पसंद थीं, को पटकथा बहà¥à¤¤ पसंद आई। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इस पर अधिक विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से चरà¥à¤šà¤¾ करने के लिठसौमà¥à¤¯, समान विचारधारा वाले सिनà¥à¤¹à¤¾ को अगले दिन अपने बंगले पर बà¥à¤²à¤¾à¤¯à¤¾ और जब निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• ने उनकी पतà¥à¤¨à¥€ सायरा बानो को उनके सामने कासà¥à¤Ÿ करने का सà¥à¤à¤¾à¤µ दिया तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ खà¥à¤¶à¥€ हà¥à¤ˆà¥¤
पिछले साल 16 जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ को à¤à¤• इंसà¥à¤Ÿà¤¾à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® पोसà¥à¤Ÿ में सायरा बानो ने सà¥à¤µà¥€à¤•ार किया था कि सगीना उनकी बेहद पसंदीदा फिलà¥à¤®à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है। सायरा ने बताया कि यह शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤• आंदोलन की सचà¥à¤šà¥€ कहानी पर आधारित है। सगीना, à¤à¤• फैकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ मजदूर... à¤à¤• ईमानदार, आकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• और पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¾ चरितà¥à¤° है, जो उतà¥à¤¤à¤°-पूरà¥à¤µà¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤ के चाय बागानों में बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ मालिकों के अतà¥à¤¯à¤¾à¤šà¤¾à¤° के खिलाफ लड़ने वाला पहला वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ था। सगीना à¤à¤• कलà¥à¤¯à¤¾à¤£ अधिकारी बन जाता है और नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ लाता है।
सायरा याद करते हà¥à¤ कहती हैं कि उनके 'साहब' और निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• अचà¥à¤›à¥‡ दोसà¥à¤¤ बन गठथे और गयाबाड़ी में आउटडोर शूटिंग के दौरान दिलीप कà¥à¤®à¤¾à¤° ने बगीचे में à¤à¤• बैडमिंटन कोरà¥à¤Ÿ बनवाया था। इसमें पैकअप के बाद पूरी टीम खेलती थी। बाद में वे आराम से घर में à¤à¤• साथ इकटà¥à¤ ा होकर गाते और हंसी-मजाक करते।
टà¥à¤°à¥‡à¤¨ के साथ दौड़
सायरा इस फिलà¥à¤® से अपना à¤à¤• पसंदीदा सीन à¤à¥€ साà¤à¤¾ करती हैं जहां सगीना, à¤à¤• मजबूत, मिलनसार आदमी, पूरे दिन अपने कारà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में बैठे रहने से ऊब जाता है और घà¥à¤Ÿà¤¨ महसूस करता है। तब ताजा हवा में सांस लेने के लिठवह बाहर निकलता है और टॉय टà¥à¤°à¥‡à¤¨ को फà¥à¤¸à¤«à¥à¤¸à¤¾à¤¤à¤¾ हà¥à¤† देखता है, जो उसकी गति से मेल खाती है। मà¥à¤à¥‡ लगता है कि यह साहिब के सबसे मंतà¥à¤°à¤®à¥à¤—à¥à¤§ कर देने वाले दृशà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है। इस विशेष शॉट के बारे में बात करते हà¥à¤ सिनà¥à¤¹à¤¾ ने खà¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¾ किया था कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने दिलीप कà¥à¤®à¤¾à¤° से अपने खांटी अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ के तरीके को छोड़ने का आगà¥à¤°à¤¹ किया था और अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¤¾ ने उनकी बात मानी थी। टà¥à¤°à¥‡à¤¨ गà¥à¤œà¤°à¤¤à¥‡ ही à¤à¤• बचà¥à¤šà¥‡ की तरह खà¥à¤¶à¥€ से उछल पड़ने वाला वह दृशà¥à¤¯ कैमरे में कैद होकर यादगार बन गया।
कामयाबी का विसà¥à¤¤à¤¾à¤°
हालांकि, निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤• को सबसे बड़ी मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ तब मिली जब सगीना महतो ने मॉसà¥à¤•ो फिलà¥à¤® फेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤² में à¤à¤«à¥à¤°à¥‹-à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार जीता। à¤à¤• तरह से फिलà¥à¤® को दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤° के कमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤¸à¥à¤Ÿà¥‹à¤‚ की à¤à¥€ मंजूरी मिली। फिलà¥à¤® बहà¥à¤¤ बड़ी हिट रही। इसने हीरक जयंती मनाई और पांच BFJA पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार जीते। इनमें सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¤¾ (दिलीप कà¥à¤®à¤¾à¤°), सहायक à¤à¥‚मिका में सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ अà¤à¤¿à¤¨à¥‡à¤¤à¤¾ (अनिल चटरà¥à¤œà¥€), सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ कला निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¨ (सà¥à¤¨à¥€à¤¤à¤¿ मितà¥à¤°à¤¾), सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ संगीत (तपन सिनà¥à¤¹à¤¾) और सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ पà¥à¤°à¥à¤· पारà¥à¤¶à¥à¤µà¤—ायक (अनूप घोषाल) शामिल थे। चार साल बाद इसका हिंदी संसà¥à¤•रण आया। इसे बस सगीना कहा जाता है। यह बड़े बजट पर बनाई गई थी और रंगीन थी, लेकिन यह मूल की सफलता जैसे जादू न जगा सकी।
-बॉलीवà¥à¤¡ इनसाइडर
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