पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° और दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ साहितà¥à¤¯ के समीकà¥à¤·à¤•ों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¶à¤‚सित विदà¥à¤µà¤¾à¤¨ डॉ. कमल डी. वरà¥à¤®à¤¾ का इस सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ वाशिंगटन, डीसी में निधन हो गया। उनकी मृतà¥à¤¯à¥ पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक कारणों से हà¥à¤ˆ बताई गई है। वह अगले महीने अपà¥à¤°à¥ˆà¤² में 92 साल के होने वाले थे। पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° वरà¥à¤®à¤¾ ने पेंसिलà¥à¤µà¥‡à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में जॉनà¥à¤¸à¤Ÿà¤¾à¤‰à¤¨ (यूपीजे) में पिटà¥à¤¸à¤¬à¤°à¥à¤— विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में 42 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ तक पढ़ाया। रिटायर होने के बाद उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤®à¥‡à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¸ और विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· के सलाहकार के रूप में काम करना जारी रखा।
वह साउथ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ रिवà¥à¤¯à¥‚ और साउथ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ लिटरेरी à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ के संसà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤• सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• थे। उनका उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ और अनà¥à¤¯ दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤ˆ लेखकों और विचारों को बढ़ावा देना था। यूपीजे के अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· डॉ. जेम सà¥à¤ªà¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¤° ने डॉ. वरà¥à¤®à¤¾ को à¤à¤• शानदार विदà¥à¤µà¤¾à¤¨, à¤à¤• असाधारण शिकà¥à¤·à¤•, मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤•, à¤à¤• उचà¥à¤š समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ सहयोगी और à¤à¤• पà¥à¤°à¤¿à¤¯ मितà¥à¤° कहा।
छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ की डॉ. वरà¥à¤®à¤¾ के बारे में राय à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° की रही है जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सोच, विशà¥à¤²à¥‡à¤·à¤£à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• और लेखन कौशल को गहरा किया। कोई à¤à¤¸à¤¾ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ जिसने छातà¥à¤°à¥‹à¤‚ की दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की अपनी समठको गहरा किया। जिनकी ककà¥à¤·à¤¾à¤“ं ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आजीवन सफलता के लिठतैयार किया। डॉ. वरà¥à¤®à¤¾ का जनà¥à¤® 1932 में पंजाब, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में हà¥à¤† था। वह à¤à¤• बड़े परिवार में सबसे बड़े बेटे थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 1951 में पंजाब के जालंधर में डीà¤à¤µà¥€ कॉलेज से बीठकिया। उसके बाद 1953 में आगरा विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से अधà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¨ में बीठऔर 1958 में पंजाब विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ में à¤à¤®à¤ किया।
वह पंजाब में à¤à¤• कॉलेज के पà¥à¤°à¤¿à¤‚सिपल बने जहां उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 1963 तक पढ़ाया। इसके बाद उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उतà¥à¤¤à¤°à¥€ आयोवा विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में शिकà¥à¤·à¤¾ की डिगà¥à¤°à¥€ में विशेषजà¥à¤ž पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने के लिठफोरà¥à¤¡ फाउंडेशन फैलोशिप पर संयà¥à¤•à¥à¤¤ राजà¥à¤¯ अमेरिका के लिठपà¥à¤°à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤¨ किया। इसके बाद उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने साहितà¥à¤¯ में आगे की वà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤¸à¤¾à¤¯à¤¿à¤• पढ़ाई की। कनाडा के à¤à¤¡à¤®à¥‹à¤‚टन में अलà¥à¤¬à¤°à¥à¤Ÿà¤¾ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ से पीà¤à¤šà¤¡à¥€ पूरी की।
डॉ. वरà¥à¤®à¤¾ की पतà¥à¤¨à¥€ सावितà¥à¤°à¥€ à¤à¤• शिकà¥à¤·à¤• और à¤à¤¾à¤°à¤¤ में à¤à¤• महिला कॉलेज की पà¥à¤°à¤®à¥à¤– à¤à¥€ रही हैं। उनके पांच बचà¥à¤šà¥‡, राजीव, रोमा, रीता, अमिता और रिचरà¥à¤¡ 1971 में जॉनà¥à¤¸à¤Ÿà¤¾à¤‰à¤¨, पेंसिलà¥à¤µà¥‡à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में बस गà¤à¥¤ वे इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में जाने वाले पहले à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अमेरिकी परिवार थे। डॉ. वरà¥à¤®à¤¾ के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ ने वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯, चिकितà¥à¤¸à¤¾ और कानून में करियर बनाà¤à¥¤ उनके बेटे रिचरà¥à¤¡ राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ ओबामा के लिठà¤à¤¾à¤°à¤¤ में अमेरिकी राजदूत के रूप में सेवा किया। वह वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में राजà¥à¤¯ के उप सचिव के रूप में काम करते हैं।
रिचरà¥à¤¡ पिछले महीने नई दिलà¥à¤²à¥€ में थे, जहां उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने ऑबà¥à¤œà¤°à¥à¤µà¤° रिसरà¥à¤š फाउंडेशन में à¤à¤• वà¥à¤¯à¤¾à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤¨ दिया था। उलà¥à¤²à¥‡à¤– किया कि कैसे उनके पिता ने लाखों अनà¥à¤¯ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अमेरिकियों की तरह अपने नठदेश के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤ˆ, लेकिन à¤à¤¾à¤°à¤¤ के साथ संबंधों को बनाठरखा और मजबूत à¤à¥€ किया।
पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ मोदी ने पिछले हफà¥à¤¤à¥‡ राजदूत वरà¥à¤®à¤¾ को à¤à¥‡à¤œà¥‡ à¤à¤• पतà¥à¤° में लिखा कि पà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‡à¤¸à¤° कमल वरà¥à¤®à¤¾ हर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ धैरà¥à¤¯ और दृढ़ संकलà¥à¤ª के सचà¥à¤šà¥‡ अवतार थे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने विदेश में अपने परिवार को बेहतर जीवन देने के लिठकड़ी मेहनत की। साथ ही साथ अपनी à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ जड़ों के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ सचà¥à¤šà¥‡ बने रहे। वे हमेशा अपनी मातृà¤à¥‚मि में याद किठजाà¤à¤‚गे।
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