कोलंबिया यूनिवरà¥à¤¸à¤¿à¤Ÿà¥€ की Wallach आरà¥à¤Ÿ गैलरी ने अलग-अलग समूह से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ लोगों को 'लà¥à¤•िंग फॉर आवरसेलà¥à¤«: गौरी गिलà¥à¤¸ द अमेरिकनà¥à¤¸, 2000-2007' के लिठआमंतà¥à¤°à¤¿à¤¤ किया है। पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ में गौरी गिल के काम को दिखाया गया है। गौरी à¤à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित फोटोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¤° हैं। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤°à¤¿à¤•à¥à¤¸ पिकà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार मिल चà¥à¤•ा है।
दकà¥à¤·à¤¿à¤£ à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾ के समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ यह पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ 22 मारà¥à¤š से शà¥à¤°à¥‚ होकर 7 अपà¥à¤°à¥ˆà¤² तक जारी रहेगा। पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ फोटोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¤° के पोरà¥à¤Ÿà¤«à¥‹à¤²à¤¿à¤¯à¥‹, 'द अमेरिकनà¥à¤¸, 2000-2007' से काम के शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ संगà¥à¤°à¤¹ पर रोशनी डालती है। इस सीरीज को ठीक 16 साल पहले à¤à¤¾à¤°à¤¤ के संगà¥à¤°à¤¹à¤¾à¤²à¤¯à¥‹à¤‚ और विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ गैलरी में पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ किया गया था। फिर अमेरिका में अपनी पहली यातà¥à¤°à¤¾ के बाद इसे फिर से पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ किया जा रहा है।
'खà¥à¤¦ की तलाश' अमेरिका में आपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ जीवन में गहराई से उतरता है, पारंपरिक कथाओं और धारणाओं से परे जाता है। सामूहिक इतिहास, वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त यादों और आकांकà¥à¤·à¤¾à¤“ं के à¤à¤‚डार के रूप में यह पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ दरà¥à¤¶à¤•ों को अमेरिकियों के रूप में अपने खà¥à¤¦ की विकसित यादों को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤¿à¤‚बित करने के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ करती है।
अपने पूरे करियर के दौरान गौरी ने खà¥à¤¦ को समाज के हाशिठपर खड़े लोगों का चितà¥à¤°à¤£ करने के लिठसमरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ किया है, जिसमें सà¥à¤µà¤¦à¥‡à¤¶à¥€ लोग, हाशिठकी जातियां, खानाबदोश, छोटे किसान और मजदूर शामिल हैं। उनका काम विपरीत परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में जूठरहे लोगों की रोजमरà¥à¤°à¤¾ के असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ की बारीकियों को सामने लाने पर केंदà¥à¤°à¤¿à¤¤ है।
'द अमेरिकनà¥à¤¸, 2000-2007' गिल की पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ पहचान की खोज को à¤à¤• à¤à¤¸à¥‡ समय में दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है जब अमेरिकी मीडिया और सरकार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ संबंधित मामलों की तेजी से जांच की जाती थी। यह 9/11 की घटनाओं से पहले और बाद का चितà¥à¤°à¤£ है।
कà¥à¤¯à¥‚रेटर रोमा पटेल ने कहा कि मैं 2023 की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में सिà¤à¤Ÿà¤² में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ छातà¥à¤° जाहà¥à¤¨à¤µà¥€ कंडोला की मौत और हाल ही में नà¥à¤¯à¥‚यॉरà¥à¤• में सिख टैकà¥à¤¸à¥€ डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¤° जसमेर सिंह की मौत के आसपास की बातचीत से गहराई से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हूं। हेट कà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤® के ये उदाहरण आज अमेरिका में दिल दहला देने वाले, लेकिन आम सà¥à¤°à¥à¤–ियां हैं।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि जैसा कि हमारा समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ इन हतà¥à¤¯à¤¾à¤“ं पर शोक वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करता है, हम इस बात से जूà¤à¤¤à¥‡ हैं कि à¤à¤¸à¥€ कहानियां आपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के इतिहास से कैसे जà¥à¤¡à¤¼à¥€ हà¥à¤ˆ हैं और अमेरिकियों के रूप में हमारे असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ के बारे में हमारी अपनी चल रही पूछताछ, जांच और मूलà¥à¤¯à¤¾à¤‚कन को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥€ हैं। इस पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ में मैं इस बात की समठको जटिल बनाने की उमà¥à¤®à¥€à¤¦ करती हूं कि अमेरिकी कà¥à¤¯à¤¾ दिखता है और आपà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठकैसा महसूस करता है।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login