पशà¥à¤šà¤¿à¤® à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ राजà¥à¤¯ महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° गà¥à¤¡à¤¼à¥€ पड़वा को नठसाल के रूप में मनाता है। इस तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° का मà¥à¤–à¥à¤¯ आकरà¥à¤·à¤£ गà¥à¤¡à¤¼à¥€ है, जो चांदी, तांबे या कांसे से बना à¤à¤• उलà¥à¤Ÿà¤¾ कलश होता है। इसे शà¥à¤ लाल, पीले या केसरिया कपड़े से ढका जाता है। इसे घर के पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ दà¥à¤µà¤¾à¤° पर फहराया या सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ किया जाता है।
हर नठसाल के साथ नठसाल का संकलà¥à¤ª आता है। परंपरागत रूप से इस संकलà¥à¤ª की घोषणा करने के लिठ'गà¥à¤¡à¤¼à¥€' उठाई जाती है और हमारे बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤®à¤¾à¤¨ पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° यह केवल हमारे लिठनहीं बलà¥à¤•ि समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ की बेहतरी के लिठहोना चाहिà¤à¥¤ माना जाता है कि यह वह दिन है जब बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾ ने समय और बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤‚ड का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ किया था। गà¥à¤¡à¤¼à¥€ बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾ के धà¥à¤µà¤œ (बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤§à¥à¤µà¤œ) का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करती है।
कà¥à¤› लोगों के लिठयह दà¥à¤·à¥à¤Ÿ रावण पर विजय के बाद अयोधà¥à¤¯à¤¾ में राम के राजà¥à¤¯à¤¾à¤à¤¿à¤·à¥‡à¤• की याद दिलाता है और गà¥à¤¡à¤¼à¥€ को राम की जीत के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤•ातà¥à¤®à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ के रूप में और रावण का वध करने के बाद अयोधà¥à¤¯à¤¾ लौटने पर खà¥à¤¶à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करने के लिठफहराया जाता है। चूंकि जीत का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• हमेशा ऊंचा होता है इसलिठगà¥à¤¡à¤¼à¥€ (धà¥à¤µà¤œ) à¤à¥€ ऊंचा होता है।
महान à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ गणितजà¥à¤ž à¤à¤¾à¤¸à¥à¤•राचारà¥à¤¯ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° गà¥à¤¡à¤¼à¥€ पड़वा पर सूरà¥à¤¯à¥‹à¤¦à¤¯ नठसाल की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि पृथà¥à¤µà¥€ सूरà¥à¤¯ के चारों ओर अपनी à¤à¤• परिकà¥à¤°à¤®à¤¾ पूरी करती है। चैतà¥à¤° महीने के पहले दिन वसंत ऋतॠकी शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ होती है जब सूरà¥à¤¯ वसंत चौराहे (à¤à¥‚मधà¥à¤¯ रेखा और मधà¥à¤¯à¤¾à¤¹à¥à¤¨ रेखाओं के पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤šà¥à¤›à¥‡à¤¦ बिंदà¥) से ऊपर à¤à¤• सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ गà¥à¤°à¤¹à¤£ करता है। यह आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯ की बात नहीं है कि सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾ जानती थी कि पृथà¥à¤µà¥€ गोल है और सूरà¥à¤¯ के चारों ओर घूमती है न कि इसके विपरीत। यह à¤à¥€ पता था कि इस दिन बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾à¤‚डीय वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ कितनी खास होती है।
इस दिन, सूरà¥à¤¯à¥‹à¤¦à¤¯ के समय, उतà¥à¤¸à¤°à¥à¤œà¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤ªà¤¤à¤¿ आवृतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ (दिवà¥à¤¯ चेतना) को लंबे समय तक बनाठरखा जा सकता है। यह देहधारी आतà¥à¤®à¤¾ की कोशिकाओं में संचित होती है और आवशà¥à¤¯à¤•ता पड़ने पर इसका उपयोग किया जा सकता है। पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤ªà¤¤à¤¿ आवृतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ गà¥à¤¡à¤¼à¥€ को माधà¥à¤¯à¤® बनाकर वायà¥à¤®à¤‚डल से घर में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ करती हैं। (यह à¤à¤• टेलीविजन सेट के à¤à¤‚टीना की तरह ही काम करता है)।
अगले दिन, पीने के पानी के लिठघड़े का उपयोग करना चाहिठकà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤ªà¤¤à¤¿ तरंगों से à¤à¤°à¤¾ होता है और इसमें मौजूद पानी को उसी तरह का पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ देता है। इस पà¥à¤°à¤•ार वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को पूरे वरà¥à¤· पà¥à¤°à¤œà¤¾à¤ªà¤¤à¤¿ तरंगों का लाठमिलता है। इसीलिठसूरà¥à¤¯à¥‹à¤¦à¤¯ के 5-10 मिनट के à¤à¥€à¤¤à¤°, वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को गà¥à¤¡à¤¼à¥€ की आनà¥à¤·à¥à¤ ान पूरà¥à¤µà¤• पूजा करनी चाहिठऔर पूरे वरà¥à¤· सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ लाठका आनंद लेना चाहिà¤à¥¤
विशेष वà¥à¤¯à¤‚जन: उकादिचे मोदक/खाना पकाने का समय: 40 मिनट और सामगà¥à¤°à¥€...
तैयारी...
à¤à¤°à¤¾à¤ˆ...
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