à¤à¤¾à¤°à¤¤ के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤—राज में आयोजित महाकà¥à¤‚ठमेला हजारों विदेशी परà¥à¤¯à¤Ÿà¤•ों को आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ कर रहा है। आखिर कà¥à¤¯à¤¾ कारण है कि à¤à¤¸à¥‡ विदेशी जिनका हिंदू धरà¥à¤® से कोई निजी संबंध नहीं है, वह à¤à¥€ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के दूसरे कोने से इस महाआयोजन में शामिल होने के लिठआते हैं? कà¥à¤¯à¤¾ यह आसà¥à¤¥à¤¾ है, सांसà¥à¤•ृतिक आकरà¥à¤·à¤£ है या फिर कà¥à¤› और है?
अदà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ विशालता
लगà¤à¤— 40 करोड़ लोगों की à¤à¥€à¤¡à¤¼ को à¤à¤• साथ देखने की बात à¤à¥€ रोमांच पैदा करती है। लेकिन महाकà¥à¤‚ठमें आसà¥à¤¥à¤¾ के इस महासागर के बीच खड़े होकर उस ऊरà¥à¤œà¤¾ को महसूस करना बिलà¥à¤•à¥à¤² अलग अनà¥à¤à¤µ है। विदेश से आठपरà¥à¤¯à¤Ÿà¤• कà¥à¤‚ठमेले की विशालता को देखकर हैरान रह जाते हैं। दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में कहीं और इतना विशाल मेला, इतने सामंजसà¥à¤¯à¤ªà¥‚रà¥à¤£ तरीके से आयोजित नहीं होता। कतारों में चलते लाखों लोग, टेंटों की अंतहीन कतारें और हर तरफ गूंजते à¤à¤œà¤¨—कीरà¥à¤¤à¤¨.. यह अपने आप में à¤à¤• अलग अनोखा संसार नजर आता है। अगर à¤à¤¾à¤°à¤¤ की 'विविधता में à¤à¤•ता' को अनà¥à¤à¤µ करना हो, तो महाकà¥à¤‚ठसे अचà¥à¤›à¥€ जगह शायद ही कोई हो।
आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤•ता
जो लोग आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• अनà¥à¤à¥‚ति की तलाश में रहते हैं, उनके लिठकà¥à¤‚ठका मेला à¤à¤• अदà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ अवसर है। इस मेले का मà¥à¤–à¥à¤¯ अनà¥à¤·à¥à¤ ान गंगा सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ है। मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि पवितà¥à¤° जल में डà¥à¤¬à¤•ी लगाने से पिछले पापों का नाश हो जाता है और आतà¥à¤®à¤¾ की मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ की राह पà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤ हो जाती है। अलग-अलग धारà¥à¤®à¤¿à¤• विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ वाले विदेशी परà¥à¤¯à¤Ÿà¤• à¤à¥€ इस आयोजन में उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ से हिसà¥à¤¸à¤¾ लेते हैं और अनोखी ऊरà¥à¤œà¤¾ का अनà¥à¤à¤µ करते हैं।
कà¥à¤‚ठमें शरीर पर à¤à¤¸à¥à¤® लपेटे नागा साधॠकठोर साधना में लीन नजर आते हैं। दरà¥à¤¶à¤¨à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¥€ वेदांत और असà¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ के गूढ़ अरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ पर चरà¥à¤šà¤¾ करते दिखते हैं। पहली गैर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ महिला महामंडलेशà¥à¤µà¤° की उपाधि पाने वाली जापान की योगमाता केइको आइकावा जैसे लोगों के लिठकà¥à¤‚ठमेला सिरà¥à¤« à¤à¤• आयोजन नहीं बलà¥à¤•ि आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• पथ पर आगे बढ़ने का à¤à¤• परिवरà¥à¤¤à¤¨à¤•ारी मारà¥à¤— है।
सांसà¥à¤•ृतिक à¤à¤•ता
महाकà¥à¤‚ठकी धारà¥à¤®à¤¿à¤• महतà¥à¤¤à¤¾ अपनी जगह है लेकिन यह à¤à¤• सांसà¥à¤•ृतिक उतà¥à¤¸à¤µ à¤à¥€ है। यहां पारंपरिक संगीत, लोक नृतà¥à¤¯, कलाकार, शिलà¥à¤ªà¤•ार और विदà¥à¤µà¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ का मेला... यह सब à¤à¤¾à¤°à¤¤ की सांसà¥à¤•ृतिक à¤à¤µà¤‚ बौदà¥à¤§à¤¿à¤• संपनà¥à¤¨à¤¤à¤¾ की à¤à¤²à¤• पेश करता है। कà¥à¤‚ठका मेला à¤à¤¾à¤°à¤¤ की सांसà¥à¤•ृतिक धरोहर को वैशà¥à¤µà¤¿à¤• सà¥à¤¤à¤° पर विसà¥à¤¤à¤¾à¤° देने में सफल रहा है।
कई पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ हसà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ यहां सांसà¥à¤•ृतिक à¤à¤µà¤‚ आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• मिलन के लिठआती हैं। इस साल महाकà¥à¤‚ठमें सà¥à¤µà¤°à¥à¤—ीय सà¥à¤Ÿà¥€à¤µ जॉबà¥à¤¸ की पतà¥à¤¨à¥€ व परोपकारी लॉरेन पॉवेल जॉबà¥à¤¸ à¤à¥€ शामिल हà¥à¤ˆ थीं। उनके लिठयह यातà¥à¤°à¤¾ आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• खोज का à¤à¤• हिसà¥à¤¸à¤¾ थी। यह दिखाता है कि कà¥à¤‚ठमेला हर वरà¥à¤— के जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¥à¤“ं के लिठपà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ का केंदà¥à¤° बन चà¥à¤•ा है।
à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ से परे
महाकà¥à¤‚ठवह सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है, जहां à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿, दरà¥à¤¶à¤¨ और मानवीय जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¤¾ की सीमाà¤à¤‚ धà¥à¤‚धली हो जाती हैं। कà¥à¤› लोग यहां आसà¥à¤¥à¤¾ की खोज में आते हैं तो कà¥à¤› शैकà¥à¤·à¤¿à¤• अनà¥à¤µà¥‡à¤·à¤£ के लिà¤.. और कई तो सिरà¥à¤« इस असाधारण अनà¥à¤à¤µ को महसूस करने के लिठयहां की यातà¥à¤°à¤¾ करते हैं। à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿, सांसà¥à¤•ृतिक आकरà¥à¤·à¤£ या महज जिजà¥à¤žà¤¾à¤¸à¤¾... कारण चाहे कोई हो , विदेशी परà¥à¤¯à¤Ÿà¤• कà¥à¤‚ठमें आकर अपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤¾à¤¶à¤¿à¤¤ परिवरà¥à¤¤à¤¨ का अनà¥à¤à¤µ करते हैं। शायद यही महाकà¥à¤‚ठका सचà¥à¤šà¤¾ जादू है।
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