जो बाइडेन और शी जिनपिंग। यानी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के दो सबसे शकà¥à¤¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤²à¥€ नेताओं के लिठसैन फà¥à¤°à¤¾à¤‚सिसà¥à¤•ो में à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤‚त आरà¥à¤¥à¤¿à¤• सहयोग की 30वीं बैठक का मंच इससे बेहतर अवसर नहीं हो सकता था। à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ मंच और अवसर जहां दोनों देशों के शिखर नेता राषà¥à¤Ÿà¥à¤° के रूप में à¤à¤•-दूसरे के सामने आ रही चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ पर गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ से विचार कर सकते। à¤à¤¸à¤¾ नहीं है कि वाशिंगटन और बीजिंग ने दà¥à¤µà¤¿à¤ªà¤•à¥à¤·à¥€à¤¯ संबंधों में अंततः à¤à¤• अविशà¥à¤µà¤¸à¤¨à¥€à¤¯ करवट ली हो लेकिन साधारण तथà¥à¤¯ यह है कि दोनों देशों ने पारसà¥à¤ªà¤°à¤¿à¤• लाठके लिठआदान-पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ के वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• मापदंडों को निरà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¿à¤¤ किया है। संचार के रासà¥à¤¤à¥‡ खà¥à¤²à¥‡ रखने और परसà¥à¤ªà¤° सैनà¥à¤¯ आदान-पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की अनिवारà¥à¤¯à¤¤à¤¾ पर सहमति उन देशों के लिठमहतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ कदम है जो लंबे समय से तीसरे देशों या मीडिया के माधà¥à¤¯à¤® से अपà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· रूप से बातचीत में फंसे हà¥à¤ हैं। लेकिन शी की 'आकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• चमक' केवल अमेरिकी राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ तक ही सीमित नहीं रही। चीनी नेता ने वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤°à¤¿à¤• नेताओं के साथ सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ और उपयोगी बातचीत की और जापान के पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ फà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹ किशिदा के साथ दà¥à¤µà¤¿à¤ªà¤•à¥à¤·à¥€à¤¯ वारà¥à¤¤à¤¾ à¤à¥€ की। यह सही है कि शी और किशिदा के पास जूà¤à¤¨à¥‡ के अपने-अपने मसले थे लेकिन अहम यह रहा कि दोनों ने संवाद के लिठसमय निकाला। हिंद-पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤‚त देशों के साथ शी की बातचीत में मैकà¥à¤¸à¤¿à¤•ो, पेरू, फिजी और बà¥à¤°à¥à¤¨à¥‡à¤ˆ के नेताओं के साथ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त बातचीत शामिल थी। चार घंटे तक चली बाइडन-शी मà¥à¤²à¤¾à¤•ात में कà¥à¤› निजी पल à¤à¥€ थे। जैसे कि अमेरिकी राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ ने शी को अपनी पतà¥à¤¨à¥€ के लिठजनà¥à¤®à¤¦à¤¿à¤¨ का उपहार ले जाने की याद दिलाई। यही नहीं बाइडेन ने 1985 में अमेरिका की अपनी पहली यातà¥à¤°à¤¾ की पृषà¥à¤ à¤à¥‚मि में गोलà¥à¤¡à¤¨ गेट बà¥à¤°à¤¿à¤œ के साथ खड़े यà¥à¤µà¤¾ शी की अपने सेलफोन में रखी à¤à¤• तसà¥à¤µà¥€à¤° दिखाते हà¥à¤ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ दिनों को याद किया और कराया। राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ शी और बाइडेन की मà¥à¤²à¤¾à¤•ात को à¤à¤• साल हो गया था। संयà¥à¤•à¥à¤¤ राजà¥à¤¯ अमेरिका और चीन कई मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ पर दूर जा रहे हैं और यह à¤à¤• वाजिब चिंता यह है कि बीजिंग मॉसà¥à¤•ो के करीब आ रहा है। यानी सà¥à¤§à¤¾à¤° के बजाय चीजें दूरियां की दिशा पकड़ रही थीं। दूसरी ओर शी इस बात से à¤à¤²à¥€-à¤à¤¾à¤‚ति परिचित हैं कि अमेरिका धीरे-धीरे राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ चà¥à¤¨à¤¾à¤µ की गहराइयों में उतर रहा है जहां उमà¥à¤®à¥€à¤¦à¤µà¤¾à¤° यह दिखाने के लिठबयानबाजी पर अतिरिकà¥à¤¤ काम करेंगे कि चीन पर कौन 'अधिक सखà¥à¤¤' है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि मतà¤à¥‡à¤¦à¥‹à¤‚ के बावजूद राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤‚ को à¤à¤•-दूसरे के साथ बातचीत करनी होगी। इसके साथ ही बातचीत इस अहसास के साथ होनी चाहिठकि यह à¤à¤•तरफा रासà¥à¤¤à¤¾ नहीं हो सकता। राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ शी के लिठà¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤‚त या हिंद- पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤‚त कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के साथ सहयोग के कई रासà¥à¤¤à¥‡ तलाशना बिलà¥à¤•à¥à¤² ठीक है। लेकिन चीन के नेता को यह à¤à¥€ समà¤à¤¨à¤¾ चाहिठकि इन कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ के देशों को à¤à¥€ अपने राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ हितों को आगे बढ़ाना होगा, जो बीजिंग के समान न हों à¤à¤¸à¤¾ हो सकता है। जो मेरा है वह मेरा है और जो तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ है वह à¤à¥€ मेरा है- इससे तो आजकल के अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ संबंधों में कोई बात नहीं बनने वाली। विशà¥à¤µ नेताओं को यह महसूस करना चाहिठकि उपदेश देने से पहले सदà¥à¤—à¥à¤£à¥‹à¤‚ का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करना à¤à¤• अचà¥à¤›à¥€ शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ हो सकती है। यानी कà¥à¤› कहने से पहले अपनी गिरेबान में à¤à¤¾à¤‚क लेना शà¥à¤°à¥‡à¤¯à¤¸à¥à¤•र रहता है। इसी में सबका हित है और हो सकता है।
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